Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full |link| 【Web】

2. Second Chaityavandan: Shree Shantinath (श्री शांतिनाथ) Dedicated to the 16th Tirthankara, Lord Shantinath. :

"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे" — इस क्षेत्र के दर्शन मात्र से ही दुर्गति का नाश होता है।

माना जाता है कि भगवान आदिनाथ इसी वृक्ष के नीचे ध्यानमग्न हुए थे।

शुक्ल ध्यान ध्याता अमल, केवल वर लीध।" palitana 5 chaityavandan in hindi full

- द्वितीय चैत्यवंदन

मुख्य प्रवेश द्वार, पर्वत की तलहटी। हिंदी पाठ:

पंचिंदिय मिच्छा दुक्कडं, मण-वय-कायं मिच्छा दुक्कडं, अहोरत्तं संठियं मिच्छा दुक्कडं, दिवसंचरियं मिच्छा दुक्कडं, सामाइयं पडिक्कमामि। रायण रुख तळे बिराजी

"एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो;रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो।एह गिरिनी महिमा अनंत, कुण करे वखाण;चैत्री पूनमने दिने, तेह अधिको जाण।"

तीसरा चैत्यवंदन 'रायण पगलिये' नामक स्थान पर किया जाता है। प्रार्थना: "आदि जिनेश्वर रायना, छे पगला मनोहार, भाव सहित भक्ति करे, पहोंचाडे भवपार... रायण रुख तळे बिराजी, दीओ जगने संदेश, भवियण भावे..."। मान्यता है कि स्वयं भगवान ऋषभदेव ने इसी स्थान पर पहले पगलियां (पगलियाँ – पैरों के निशान) छोड़े थे। इसलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहां का चैत्यवंदन मोक्ष के निकट पहुंचने का प्रतीक है।

चैत्यवंदन की सामान्य विधि: दीओ जगने संदेश

पुंडरीक मंडन पाय प्रणमी जे, आदीश्वर जिणचंदाजी,नेम विणा त्रेवीश तीर्थंकर, गिरि चढिया आनंदीजी।आगम माहे पुंडरीक महिमा, भाख्यो ज्ञान दिणंदाजी,चैत्री पूनम दिन देवी चक्केसरी, सौभाग्य द्यो सुखंदाजी।

5. Fifth Chaityavandan: Lord Adinath (श्री आदिनाथ भगवान)

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