Ziyarat E Nahiya In Hindi -
It is used in Madrasas and during Majalis to teach children about the sacrifices made at Karbala. 4. Structure of a Typical Hindi Recitation
विशिष्ट भाग का हिंदी अनुवाद या इसके इतिहास
अल्लाह के नाम से जो दयावान और कृपालु है। ziyarat e nahiya in hindi
Ziyarat-e-Nahiya (the Pilgrimage of the Sacred Side) is a deeply moving and tragic salutation traditionally attributed to the 12th Imam, Imam Mahdi (atfs) , regarding the tragedy of Karbala. Key Features of Ziyarat-e-Nahiya Authorship and Origin
इस ज़ियारत की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इमाम मेहदी (अ.स.) स्वयं रोते हुए फरमाते हैं: It is used in Madrasas and during Majalis
इस्लामिक इतिहास, विशेष रूप से शिया समुदाय में, कर्बला की त्रासदी और इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों की शहादत को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कई 'ज़ियारत' (तीर्थयात्रा की प्रार्थनाएँ) प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक सबसे मार्मिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण ज़ियारत है - (Ziyarat e Nahiya)।
"सलाम हो उन ईमान वालों पर जिन्होंने तुम्हारा साथ दिया और तुम्हारे लिए कुर्बान हो गए।" Imam Mahdi (atfs)
यह ज़ियारत पहली बार प्रसिद्ध शिया विद्वान, सैय्यद इब्ने ताऊस (र.अ.) की किताब "इक़बालुल आमाल" में मौजूद है। इसके बाद, शेख अब्बास अल-कुम्मी (र.अ.) ने इसे अपनी मशहूर किताब में शामिल किया, तब से यह दुनियाभर के शियाओं में बहुत प्रचलित हो गई।
यह लेख शिया इस्लामी मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक जानकारी प्रदान करना है।
हे हुसैन! आपकी प्यास, आपके साथियों का वफादार होना, और आपकी बहन ज़ैनब (स.अ.) का दर्द, यह सब मेरे दिल को चीर देता है।
